आध्यात्मिक सभा (#8281)

*(जब भी तुम परामर्श के लिये सभाकक्ष में प्रवेश करो, तो ईश्वर के प्रेम से धड़कते हृदय और मात्र उसके स्मरण के अतिरिक्त अन्य सभी कुछ से मुक्त हुई जिह्वा से इस प्रार्थना का पाठ करो, जिससे कि वह सर्वशक्तिमान सर्वोच्च विजय प्राप्त कराने में अनुग्रहपूर्वक तुम्हारी सहायता करे।)
 
हे तू दिव्य साम्राज्य के स्वामी! हमारे शरीर यहाँ अवश्य एकत्र हैं, लेकिन हम मंत्रमुग्ध हैं, तुम्हारे प्रेम ने हमारे मन-प्राण को हर लिया है; हम तेरे देदीप्यमान मुखड़े की किरणों से आनंदित हो उठे हैं। भले ही हम दुर्बल हैं, किन्तु तेरे सामर्थ्‍य और शक्ति के प्रकटन की प्रतीक्षा करते हैं। भले ही हम दरिद्र हैं, सम्पत्ति और साधन से हैं हीन, फिर भी हम तेरे दिव्य साम्राज्य की निधियों से समृद्धि पाते हैं। भले ही हम हैं बूंद मात्र है, फिर भी तेरे महासिंधु की अतल गहराइयों से हम अपना भाग ग्रहण करते हैं! हम धूलकण मात्र हैं, फिर भी, तेरे सूर्य की भव्य महिमा से कांति पाते हैं। हे पालनहार ईश्वर! अपनी सहायता भेज, ताकि यहाँ एकत्रित प्रत्येक व्यक्ति एक प्रकाशित दीप बन जाये, हर एक आकर्षण का केन्द्रबिन्दु और तेरे दिव्य प्रांगण में पुकार लगाने वाला हरकारा बन जाये, ताकि हम इस अधम लोक को तेरे स्वर्ग का दर्पण बना सकें।

-`Abdu'l-Bahá
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आध्यात्मिक सभा (#8282)

*(आध्यात्मिक सभा की बैठक की समाप्ति पर यह प्रार्थना करें)
हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! अपनी एकता के अदृश्य साम्राज्य से तू देखता है कि तुझमें सम्पूर्ण आस्था, तेरे चिन्हों में सम्पूर्ण विश्वास के साथ और तेरी संविदा एवं इच्छा के प्रति अडिग होकर, तेरे प्रति आकर्षित होकर, तेरे प्रेम की अग्नि से प्रदीप्त, तेरे धर्म के प्रति निष्ठावान बन हम इस आध्यात्मिक सभा में एकत्रित हुए। हम तेरी बगिया के सेवक हैं, तेरे धर्म के प्रसारक, तेरे मुखारबिंदु के प्रति समर्पित साधक, तेरे प्रियजनों के प्रति विनम्र, तेरे द्वार पर विनत हैं और तुझसे याचना करते हैं कि अपने प्रियजनों की सेवा करने का अवसर दे, शक्ति दे कि हम तेरी आराधना कर सकें, तेरे प्रति समर्पित रह सकें और तुझसे सम्भाषण कर सकें। 
हे हमारे स्वामी! हम निर्बल हैं, तू सबल है; हम प्राणविहीन हैं, तू प्राणाधार चेतना है; हम अभावों से घिरे हैं, तू दाता, रक्षक, शक्तिशाली है। 
हे हमारे स्वामी! अपने कृपालु मुखारविन्द की ओर हमें उन्मुख कर, अपनी असीम कृपा से, अपने दिव्य सहभोज में हमें सम्मिलित कर, अपने सर्वोपरि देवदूतों द्वारा हमें सहायता दे और आभालोक के साम्राज्य के पावन जनों के द्वारा हमारी सेवा को स्वीकार कर। 
सत्य ही, तू उदार और कृपालु है; उदारताओं का स्वामी है। सत्य ही, तू क्षमाशील और करुणामय है।

-`Abdu'l-Bahá
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आध्यात्मिक सभा (#8284)

हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! हम तेरे सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय दिवस में तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से स्वयं को अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में, अपने विचारों और चिन्तन में, एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के मध्य तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे स्वामी! हमारे ईश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के चिन्ह, मनुष्यों के मध्य अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ, अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे तू हमारे परमोच्च स्वामी ! हमें अपने अब्हा साम्राज्य में अपनी दिव्य एकता की अभिव्यक्तियाँ, और सर्वत्र चमकते दीप्तिमान सितारे बना। स्वामी! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से तरंगित सागर बनने में हमारी सहायता कर, तेरे सर्वमहिमामय शिखरों से प्रवाहित सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर लगे सुमधुर फल तेरी दिव्य अंगूर-वाटिका में तेरे उदारता की समीरों से झूमते हुए तरूवर बना। हे ईश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छंदों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदय तेरी कृपा से आनंदित जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक हो जायें, तेरे देदीप्यमान प्रकाश कि किरणों के समान एक-दूसरे में विलीन हो जायें; कि हमारे विचार, हमारे मत, हमारी अनुभूतियाँ एक वास्तविकता बन जायें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को व्यक्त करें। तू कृपालु, उदार, प्रदाता, सर्वशक्तिमान, दयावान, करूणामय है।

-`Abdu'l-Bahá
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